तुम्हारे शहर में दोस्त कम दुश्मन बहुत मिलते हैं।
मेरे गांव में तो रहीम भाई राम से गले मिलते हैं।
ये तुम्हारी आदतें हैं कि तुम हमें प्रेम में काटें देते हो।
मेरे गॉंव में तो आज भी आँगन में गुलाब खिलते हैं।
अपने हीं अपनों को देख कर अनजान बन जाते हैं।
मेरे गॉंव में तो लोग अजनबी से भी हाल पूछते हैं।
हम तो झोपड़ी में भी रह कर आमांत्रित कर रहे हैं।
तुम्हारे शहर में मालिक कम किरायेदार बहुत मिलते हैं।
न पूछो "अर्जुन" कि क्या क्या देखे हमने तेरे शहर में।
संभल के रहना यहां रिश्ते पल पल बदलते हैं।