शीर्षक: अगर तुम आ जाते
दहलीज पर हम थे, खिड़कियों पर इंतजार था
तुम आओगे कभी, ये सोचकर दिल बेकरार था
भूल हुई, फ़लसफ़ा मौहब्बत का कभी जाना नहीं
न आओ, तुम तो शिकायत की अब तमन्ना भी नहीं
ख्याल ही तुम्हारे, उनसे ही दिल को बहला लेंगे
पहलू में तुम, सोच, हर आहट से गुलिस्तां सजा लेंगे
संगम दिलों का जरूरी नहीं, पर इश्क की तकदीर हो
रचे मेहबूब की मेहंदी, तो उसमें रंग सिर्फ प्यार के हो
हसरतों के जहाँ में हर ख्बाब को, पनाह मिलती नहीं
शक में रहेगा, प्यार तो तयः है, मंजिले प्यार की नहीं
रुतबा मोहबब्त का बढ़ जाता, तुम अगर आ जाते
तन्हां हुए नैनों की झील में, फिर "कमल" खिल जाते
गर जरूरी है, प्यार करना, तो वफ़ा की राह चलना
इंतजार में बीते लम्हों को, इनायत का इम्तहाँ समझना
✍️ कमल भंसाली