#जीवन_लक्ष्य
कुछ ख़्वाहिशे हो गयी पूरी कुछ अभी अधूरी हैं
मंज़िल दूर है थोड़ी हर एक कदम ज़रूरी है
कागज-कलम से लिखूं मैं खुद अपनी किस्मत
कुछ मेहनत मेरी, कुछ साथ भाग्य ओर अपनो का तो कुछ महादेव की रहमत
जीवन का लक्ष्य बड़ा ही सरल है अपना
माँ-पापा का सिर गर्व से रहे ऊंचा है इक छोटा सा सपना
शब्द वहीं निकले जुबाँ से मेरी, जो ना दुखाये दिल किसीका
हूँ जो कुछ मैं आज जिनकी वजह से सदा आभार निभाऊं उनका
जहां भी जाऊं सादगी हो पहचान मेरी
ना आए घमंड कभी ना हो खुद की भूल समझने में देरी
वक़्त के साथ हालात बदलते जाना है
मैं हमेशा से जैसी थी मुझे वैसी ही रहना है
ना करना हस्तक्षेप किसी के जीवन मे
ना अपने जीवन मे किसी जो दखलंदाज़ी करने देना है
आज है पहचान जिनसे मेरी, कल उन्हें अपने नाम से पहचान दिलाना है
जिन्होंने दिया हर कदम पर साथ मेरा, हर कदम पर उनका साथ निभाना है
नही चमकना मुझे चांद की तरह, ना तारो की भीड़ में झिलमिलाना है
मेरी अपनी दुनिया है जहां मुझे अपने दम पर अपनी पहचान बनाना है!