*जय मां शैलपुत्री*
*गुरु शुक्र युति*
गुरु = विष्णु
शुक्र = लक्ष्मी
गुरु—शुक्र की युति अर्थात विष्णु और लक्ष्मी की युति
दूसरे शब्दों में देखें तो:—
गुरु = पुरुष
शुक्र = स्त्री
गुरु—शुक्र की युति अर्थात स्त्री और पुरुष की युति
ये युति अत्यंत शुभ प्रभाव देने वाली युति है।
दोनों ग्रह शत्रु ग्रह है और विपरीत स्वभाव वाले ग्रह हैं। लेकिन दोनों ही आचार्य है, पूजनीय है। गुरु पद बहुत सारी जिम्मेदारी और उच्चता की कसौटी से हासिल होता है।
*गुरु देवताओ के गुरु है और शुक्र दैत्यों के गुरु है।*
जब दोनों मिलते हैं तो इनका फल अत्यंत शुभ फलदाई हो जाता है।
*गुरु व शुक्र युति के कार्य-तत्त्व*
धर्म, सत्य, उपासना, गौरव, आध्यात्मिक्ता, ज्ञान आदि बातें गुरु के कार्य तत्त्व में आती है।
जबकि मनोरंजन, प्रेम, ऐश्वर्य, सुख—सुविधा, भोग—विलास ये सभी शुक्र के कार्य तत्त्व में आते है।
*गुरु-शुक्र युति के सकारात्मक परिणाम*
दोनों की युति अगर किसी की कुंडली में बनती है तो वह बहुत ही ज्यादा महत्वकांक्षी हो जाता है। ऐसे व्यक्ति ऊंची उड़ान वाले होते है उनकी इक्छाएं बहुत ही बड़ी होती है भले ही उन्होंने किसी भी परिवार में जन्म लिया हो।
ऐसी युति वाले लोग पारिवारिक जिम्मेदारी काफी अच्छे से निभाते है और इन्हे पारिवारिक सुख भी मिलता है।
धन के सम्बन्ध में ये युति बहुत अच्छा फल देती है। ऐसे लोग प्रतिष्ठित जगह पर काम कर बड़ी मात्रा में धन अर्जित करते है।
*नकारात्मक प्रभाव*
गुरु-शुक्र की युति बहुत ही ज्यादा उलझन उत्पन्न करती है। वे निश्चय नहीं कर पाते की अपने जीवन में मनोरंजन, ऐश्वर्य, रोमांच को भोगे या फिर योग साधना के पथ पर चलके संतोषपूर्ण जीवन व्यतीत करे।
कोई भी इनकी बात को गलत न समझे और इनके विषय में गलत न सोचे, इसका ये ज्यादा ख्याल रखते है।
प्यार मोहब्बत के मामले में भी ज्यादा खुलते नहीं है। ये लोग बेवजह की बाधाओ में घिरे रहते है|
गुरु, व्यक्ति की कुंडली में सबसे ज्यादा शुभता देने वाला ग्रह है|
अगर वह किसी शत्रु ग्रह के साथ विराजमान होगा तो कही न कही अपने कार्य तत्त्व में आने वाली चीजों में बाधा उत्पन्न करेगा।
ऐसे लोगों की कुंडली में संतान बाधा भी देखने को मिलती है। जहा गुरु ग्रह शुभता देता है, वही शुक्र ग्रह समृद्धि देता है।
ऐसे दो ग्रह जब साथ आते है, तो व्यक्ति कुछ अलग कार्य करता है कुछ नया करता है।
कई बार शुक्र की दृस्टि हावी होने के कारण, लोग घर परिवार की बात सुनते भी नहीं है।
उनके खिलाफ निर्णय लेते है। कई बार घर की महिलाओ के साथ इनका सम्बन्ध अपेक्षाकृत अच्छा नहीं पाया जाता।
*निष्कर्ष*
यह युति जातक को आध्यात्म और भोग—विलास दोनों ही क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ बनाती है। अब यह जातक के विवेक पर निर्भर करता है कि वह कब कौनसा मार्ग चुनता है।
इस युति के होने का एक संकेत यह भी है कि ईश्वर आपके द्वारा किसी नयी चीज़ का निर्माण करना चाहते है, तभी आपकी कुंडली में गुरु-शुक्र की युति है।
*ज्योतिषाचार्य डॉ दीपक सिक्का*
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