🙏 मां का पल्लू 🙏
डूबती मेरी नैया को अपने पल्लू से पार किया था
अपने घर के अंधेरे को उसने पल्लू से रोशन किया था
मेरे आंसु ओर अपने पसीने को उसी पल्लू से पोंछा था
बचपन में उसी पल्लू के सहारे पा पा पगली सीखा था
पकड़कर पल्लू में मां का सारा महोल्ला घुमा था
दुनिया वालों की डांट से में उसी पल्लू में छूपा था
याद आया आज फिर से वो पल्लू ,जो मां ने खूब ताव से कंधे पे मेरे रखा था
🙏Aj......