स्वतंत्रता दिवस और हम
स्वतंत्रता की वर्षगांठ पर
शहीदों की शहादत को
और सीमा पर डटे हुये सैनिकों को
हमारा सलाम !
इस वर्ष भी
जगह-जगह ध्वजारोहण
नेताओें के लम्बे-चौडे़ भाषण
शालाओं में मिष्ठान्न वितरण
गली-गली में लाउड स्पीकर पर गूंजते
फिल्मी राष्ट्रीय गीत।
हो गया स्वतंत्रता-दिवस का समापन।
स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा
जय जवान-जय किसान और सत्यमेव जयते जैसे
देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत
राष्ट्र के लिये समर्पण का उद्घोष गुंजाने वाले
नारे जाने कहाँ खो गये।
शायद इतिहास का पन्ना हो गये।
आज भी भारत माता के
कुछ भाग पर पाकिस्तान
और कुछ भाग पर काबिज है चीन।
भारत माता का वह अंग
आज भी है पराधीन
आज भी वह भू-भाग
कर रहा है प्रतीक्षा स्वतंत्रता की।
फिर हम कैसे स्वतंत्र हैं
और कैसा है हमारा स्वतंत्रता-दिवस।
जनता है तैयार
सैनिकों को है आदेश का इंतजार
परंतु हमारे नेता
शांति वार्ताओं के नाम पर
समय गंवा रहें हैं।
जनता को बेवकूफ बना रहे हैं।
आज हमारे देश में
भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद तथा रिश्वतखोरी
निर्माण और विकास को खोखला बना रहे हैं।
हमारे नेता इन्हें मिटाने के स्थान पर
इन्हीं के साथ रंगरलियां रचा रहे हैं।
केवल अपनी कुर्सी बचा रहे हैं।
चीन और पाकिस्तान
देश में आतंकवाद और
नक्सलवाद फैला रहे हैं।
सारा देश इनसे निपटने में व्यस्त है
और वे इसे देख-देखकर मद मस्त हैं।
जागना होगा नई पीढी को
लेना होगा अपने कंधों पर देश का भार।
देश भक्ति जनसेवा को करना होगा साकार।
लेना होगा संकल्प
अपनी धरती को मुक्त कराने का
करना होगा प्रण
अन्याय और शोषण को मिटाने का।
जिस दिन यह सब हो जायेगा
उस दिन असली स्वतंत्रता दिवस आयेगा।
तब हम गर्व से कह पायेंगे,
हम हैं स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिक।
तभी झलकेगा देश का स्वाभिमान
और तब पूरे विश्व में मिलेगा
हमारे देश को
यश और सम्मान।