ये शौहरत की आहट सी कुछ तो कह रही है, मेरी महफिल इन दिखवातो पे जी रही है, के अब रुतबा अमीरी का नहीं इसे गरीब भी सह रही है। मेरे हशल पर हसने वालो, ये जिंदगी अब तुम पर ही हॅस रही है, जो खुदार कहा करते थे तुम मुझे, आज क्या हूं मैं ये मैं नहीं, मेरी मुस्कान ही सब कुछ कह रही है। की बात हर रोज करते हैं मेरी हेसियत की, फ़र्क इतना है बस अब, बाते वही है, पर मेरी अहमियत की हो रही है।