अंतिम रात
आज की रात मुझे
गहरी नींद में सोने दो
क्या जाने
कल का सूरज देखूं
या ना देख सकूं
चांद के दूधिया प्रकाश को
दस्तक देने दो
मेरी आत्मा के द्वार पर।
जा रहा हूँ -
अंधकार से प्रकाश की ओर
जाग रहा है -
भूत, वर्तमान और भविष्य का अहसास।
हो जाने दो -
पाप और पुण्य का हिसाब।
आ गया है अंत -
आ जाने दो।
बरसने दो उस अनंत की कृपा
जगमगाने देा आत्मा
मैंने किये जो धर्म से कर्म
स्थापित रहें।
उनका फल मिले
परिवार और समाज को
ऐसी प्रार्थना करते करते ही
गहरी नींद में सो गया।
प्रारंभ से अंत नही
अंत से प्रारंभ हो गया।