क्यों मिलते हो रोज़ राहों में।
गर आना नहीं मेरी बाहों में।
बहुत गम सहे अब और नहीं।
मैं दीवानी तुम बंदिशों में बंधा।
ऐसे मिलना मुमकिन ना कभी।
इश्क़ हुस्न की मंजिल है एक।
परदा हटा नजरें उठा देख मुझे।
सब पे यह इनायात होती नही।
गर कदर हो वो रूह सोती नही।
जिस्मों की ही नहीं,जन्मों की आग है।
मिला रब से अमर प्रेम का राग है।
आ मिलकर गाएं अमर हो जाएं।
छोड़ दुनिया अबंर पर बस जाएं।