Hindi Quote in Poem by Sudhir Srivastava

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

वो बरसात की रात
***************
आज भी सिहर जाता हूँ
याद करके वो मनहूस बरसात,
जो मेरी परीक्षा लेते लेते
मेरी अबोध बच्ची को निगल गई।
शायद ईश्वर को यही मंजूर था
तभी तो बेतरतीब हवाऐं
टूटे फूटे छप्पर तक को उड़ा ले गई,
सिर छुपाने का इकलौता
आश्रय भी छीन ले गई।
घुप काली रात,
डरावनें बादलों की गड़गडाहट
रह रहकर कलेजे को चीरती
चमकती बिजली
ऊपर से मूसलाधार वारिश
उसमें भीगते हम पति पत्नी
और हमारी मासूम बच्ची,
हम तो कलेजा मजबूत किए
सहने को विवश थे मगर
हमारी बच्ची माँ के सीने से
चिमटी की चिमटी रह गई
हमें रोता बिलखता छोड़ गई।
● सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित

Hindi Poem by Sudhir Srivastava : 111713462
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now