रात का पहरा हटा सूर्य मुक्त हो गया,
किरणों के प्रकाश में चांद कहीं खो गया।
ले करके अंगड़ाइयां भोर तो अब हो गई,
लेकिन मानव जग रहा पर आत्मा कहीं है सो गई।
आत्मा की लौ जलाओ तो मन का तिमिर सब मिटे,
भावनाओं को जगाओ प्रेम दीप जल उठे।
कर लो इरादा पत्थरों को काट कर राहें बनाएं,
लक्ष्य कितना ही बड़ा हो पाने की एक राह बने।
पूनम देवी राज