अपना अगर कहते हो किसी को, तो मिलते भी रहा करो।
बातें करो, झगड़ा करो,
शिकवा करो, गिला करो,
कभी कभी जा कर उनसे भी मिला करो।।
कभी रूबरू बैठ कर किस्से भी सुना करो,
डांट दो कभी , कभी गले भी मिला करो।
अपना अगर कहते हो किसी को,
मिलते भी रहा करो।।
ज़िन्दगी छोटी सी है, कुछ रिश्ते कमा लिया करो,
कोई रूठा हो तो मना लिया करो।
दूध अगर फट जाए रिश्तों का कभी,तो पनीर बना लिया करो।
अपना अगर कहते हो किसी को,
तो मिलते भी रहा करो।।
माना दिल में बहुत मुहब्बत भरी है तुम्हारे,
वक़्त बेवक्त जता भी दिया करो।
करते तो बहुत कुछ हो तुम उसके लिए, कभी बता भी दिया करो।
अपना अगर कहते हो किसी को,
तो मिलते भी रहा करो।।
वक़्त गुजारने के लिए इंटरनेट काफी है आजकल,
कभी अपने से गुफ्तगू करके जिंदगी भी जिया करो।
व्हाट्स अप,fb सब अच्छा है, कभी पिकनिक भी किया करो।
अपना अगर कहते हो किसी को,
तो मिलते भी रहा करो।।
छेड़ दो कोई पुराना खुशनुमा किस्सा कभी,
कभी टांग भी खींच लिया करो।
कभी नाचो, कभी खिलखिलाओ कभी गुनगुना लिया करो।
अपना अगर कहते हो किसी को,
तो मिलते भी रहा करो।।
छोटी सी ये ज़िन्दगी कट जाएगी यूं हीं,
अपनों के बीच बैठ कर कभी चाय पियो, पकोड़े भी तला करो।
कह दो दिल की, और बस दिल की ही सुना करो।
कोई बात करे अगर मरने की तो उसको एक कान के नीचे रख के दिया करो।
गले लगा लो उस साले को, मगर मरने मत दिया करो, बस मरने मत दिया करो।
अपना अगर कहते हो किसी को,
तो मिलते भी रहा करो।।
✒️कृति - सृष्टि तिवाड़ी