🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹बंध गए हैं हाथ मेरे तू बता कैसे लिखूं जब खता कोई नहीं है फिर खता कैसे लिखूं🌹🌹 वक्त की नाकामियों ने कर दिया अंधा मुझे वह शहर से इस शहर का रास्ता कैसे लिखूं🌹🌹 काटते सुबह कहीं पर रात कटती है कहीं अजनबी से शहर में अपना पता कैसे लिखूं🌹🌹 मंदिर के द्वार पर जब बुझ गए दिए फिर बता इन पत्थरों को देवता कैसे लिखूं🌹🌹 एक जरा सी बात पर ही हो गए दोनों जुदा कौन जीता कौन हारा यह कथा कैसे लिखूं💔💔💔💔💔💔💔💔
-Manny Sharma