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एक लड़का जिसे प्रेम की ज़रा समझ नहीं है मगर उसे तुमसे प्रेम हो गया। वो भी सिर्फ तीन दिनों में और वो ये सोच कर कि,"अगर नहीं कह पाया अभी तो ज़िंदगी में कभी नहीं कह पाउँगा" थोड़ा डर और थोड़ी झिझक के साथ बिना कोई बाउंड्री बनाये तुम्हें कह देता है, 'I Love You.'
और तुम ब्लैंक हो जाती हो कि क्या जवाब दूँ उसे। ऐसे कैसे दो दिन में किसी को प्यार हो जायेगा? तुम कंफ्यूज रहती हो। उसे कोई जवाब नहीं देती। वो भी तुमसे कोई जवाब नहीं मांगता और देता है वक़्त तुम्हें। करता है इंतज़ार तुम्हारे हाँ का।
तुम अब भी कंफ्यूज ही रहती हो, क्यूंकि न तो वो रोमांटिक हैं, नहीं उसे आता है प्यार भरी बातें बनाना। फोन पर भी चार बातों के बाद चुप हो जाता है, क्यूंकि उसकी बातें ख़त्म हो जाती है। वो सुनता रहता है तुम्हें। तुम्हारी होप्लेस-रोमांटिक कहानियों को, बे-सिर-पैर वाले सपनों को। तुम बिना किसी परवाह के अपनी रौ में बहते हुए उसे अपने पहले क्रश से लेकर, कॉलेज में कितने लड़कों ने प्रपोज़ किया बताती जाती हो। तुम अपने अमरुद के पेड़ से लेकर, दादा जी और दाई जी के गौने के किस्से सुबह के तीन बजे सुनाती हो और वो सुनता रहता है।
और ऐसे ही किसी सुबह के तीन बजे तुम्हें एहसास हो जाता है कि, 'He is the One.'
यहाँ से शुरू होती है असली कहानी। वो लड़का जिसे प्रेम की समझ नहीं है पड़ चूका है ऐसी लड़की के प्रेम में जिसे चाँद,तारे, बादल,फ़राज़ और न जाने किन-किन शहरों से इश्क है। जो हर शै में रोमांस ढूंढ लेती है। जो हर गाने में से एक लाइन चुरा कर लड़के को भेजती है और फिर सोचती है कि लड़का भी यही करेगा।
मगर लड़का तो ख़ब्ती है। उसे इन मुलायम बातों की समझ कहाँ है! ऐसे में वो कोशिश करता है,
अपने बेसुरे आवाज़ में गाने का,
तुम्हारे लिए बे-सिर-पैर वाली कविताओं को लिखने का,
फ़राज़ को पढ़ने का और फिर उनकी ग़ज़लों को रिसाइट करके भेजने का,
चाँद को देख कर फ़ोन करता है और तुम्हें बुलाता है बॉलकनी में चाँद दिखाने को,
और बनाता है चाय रात के तीन बजे कि जग कर और देर तक बतिया सके,
तो तुमसे ज़्यादा क़िस्मत वाली और कोई लड़की नहीं है। यही प्रेम है और उस झक्की लड़के से ज़्यादा तुम्हें कोई नहीं चाह सकता। समझी बालिके!