सोचा न था वक़्त ईश् कदर बीत जायेगा ,
कमाने चंद पैसा ,
पूरी उम्र गुज़र जाएगी,
होंगे ना वो ख्वाब पूरे ,
सोचा था करंगे कमाके पूरे ,
जुट गए दौड़ में सब....चंद पैसा कमाने की ,
और कमा भी लिया बहोत धन सबने ,
खड़े है वो सब आज कतारो में ,
ख़रीदने को कुछ और साँसे ,
पैसो का उन्होंने पहाड़ बनाया ,
जो आज खुद ही काम न आया ,
इंतज़ार है बस , अब मौत के आने का ,
आज़ाद होके उड़ जाने का ,
तभी दूर से एक छाया आया ,
चहेरा कुछ पहचान था ,
लगता था उसे देखके
सायद वो कोई अपना था ,
और ये क्या....?? (२)
आज खुद ख्वाब आये थे उसे मिलने को ....!!
जो देखे थे उसने सालो पहले ,
आज बड़ा पछतावा हुआ , ये क्या कर डाला मेने ...?
कमाने चंद पैसा पूरा जीवन बर्बाद करदाला ...?
तभी आंखे खुली , था ये एक सपना ,
लेकिन ये चोट सपना बहोत सीख गया....
अब आगे......!!!? फिर मिलते है आगे की कहानी के साथ ।
पार्थिव पटेल ' अवनीश '