एक अरसा हुआ किसी से दिल लगाए हुए।
कुछ दर्द कुछ गम तो कुछ जख्म छुपाये हुए।
कहीं भूल न जाऊँ उस दर्द को जो उसने दिए।
जख्म को ताजा कर रखा है नमक लगाए हुए।
मासूम था जमाने की रंज ओ गम से बे खबर।
चल पड़ा हूँ रास्ते पर मैं जमाने के दिखाए हुए।
किसी को अच्छा लगे या बुरा मुझे फर्क नहीं ।
आखिर हम भी तो हैं जमाने के सताए हुए।