सरपंच ने अफवाह उड़ा दी सड़क बनने वाली है
जाएगी सबकी खेतीबारी कल गिट्टी गिरने वाली है
गॉंव के बूढ़े-बुजुर्ग करने लगे हैं मंत्रणा.
कटेंगे पेड़ आम के नहीं बचेगा संतरा।
सब चिंतित हो बोले ,अब क्या होगा हमारी जमीन का।
अभी फसल भी कटी नहीं है कर्ज़ बाकी है अमीन का।
इस संकट की घड़ी में अब हमे कौन बचाने आएगा।
कोई तो आगे आये कौन सरपंच को बुलाने जाएगा।
रामदीन आगे आया बोला दद्दा अभी हम आते हैं।
आप सब घबराइए नहीं मुखिया को बुला के लाते हैं।
सरपंच जी भी आ गए आँवले की बाग में।
आते ही घी डाल दिए जलती हुई आग में।
किसी ने विरोध किया तो जाएगा घर द्वार भी
मेरी मानो चुप रहो नाराज़ हो जाएगी सरकार भी।
वो तो मैं था जो हुक्मरान को संभाल लिया।
खेती बारी जाए मगर घर-बार को निकाल लिया।
सब हाथ जोड़ के खड़े हो गए क्या होगा हमारा सोचिए
सरपंच जी हमें बचाइए जल्दी सड़क को रोकिए।
मन ही मन सरपंच जी मुस्कुराए मूंछो पर हाथ फेरा ताव से।
सोचने लगे अगली पंचवर्षी भी मेरी कौन हटाएगा गॉंव से।
कुछ सोच कर बोले ,रुपया सबसे इकठ्ठा कीजिये।
जितना भी हो सके शाम तक ला के हमको दीजिए।
अगर कुछ कम पड़ेगा तो मैं भी सहयोग करूंगा आपका
जमीन आपकी न जाने देंगे अगर आशीर्वाद रहेगा आपका।
मैं कल सुबह मिलने जाऊँगा मुख्य मंत्री के दरबार में
आप सब चिंता न करो मेरा आदमी है सरकार में।
गॉंव वाले खुश हो के एक दूसरे को देखने लगे।
बहुत पहुँच वाला है सरपंच बात यही सोचने लगे।
सरपंच का सीना चौड़ा हो गया खेल अपना जीत के।
चुनाव दुबारा जीत गया एक लक्षमन रेखा खींच के।
कभी मौका मिले तो जाइये आप भी किसी गाँव में।
देखिए क्या मिलता है पीपल की छाँव में।
न ठंढ़ा पानी मिलेगा न पुरवइया बयार होगी।
कुंआं सूखा होगा विकास की दरकार होगी।
कितने सांसद और विधायक जीतते हैं इसी गाँव से।
गाँव का पुल टूट गया है जाते हैं सभी नाव से।
और क्या लिखूं "अर्जुन" अपनी कलम रूपी तलवार से।
अमन चैन,रोजगार मिले इल्तिज़ा यही सरकार से।