•?((¯°·..• कलम-ए-इश्क •..·°¯))؟•
मेरे दिल का सुलगता दर्द काश तुमनें देखा होता
मेरी बेइंतहा मोहब्बत को काश तुमनें परखा होता
इतनी दुरियाँ ना होती तेरे मेरे दरमियाँ सनम
मुझे तन्हा छोड़ जाने से पहले काश तुमनें सोचा होता
अश्क़ों का सैलाब लिए फिरते है दर-बदर सनम
मेरे अनकहे जज़्बातों को काश तुमनें समझा होता
यकीन करना था मेरी मोहब्बत पर सनम
तुमसे जीवन की हर खुशी काश तुमनें जाना होता
यू रुसवा न करके दिल ना तोड़ते हमारा सनम
इश्क़ मे राह -ए -वफ़ा को काश तुमनें माना होता
कितने जख़्म हुए है इस दिलपर सनम
मेरे दिल पर वार करने से पहले काश तुमनें रोका होता
ताउम्र साथ देने का वादा किया हमने सनम
मैं जैसी हूँ, तुम्हारी हूँ काश तुमनें मुझे अपनाया होता