मुज मे मेरा कुछ नहीं बस दो हिस्से आधे आधे,
ईक बिन रह ना पाउ दुजा मुझे तडपाऐ,
गोपी मेरी जान का हिस्सा, राधा तुम भी आधा हिस्सा,
तुझसे दूर ही हु पर पास रहेना चाहु,
हर रात तेरे संग, फिर सुबह भी तेरे संग जगना चाहु,
कभी बैठ मेरे खवाबों के शामियाने में,
मै तुजे अपना रंगीन जहाँ दिखाऊं,
तुझे इतना रुलाउ फिर हँसना भी शिखा दु,
मुज मे मेरा कुछ नहीं बस दो हिस्से आधे आधे ...
-Ila Sheth