वक़त पड़े तो पहचानो
अपने कौन पराए कौन
दिल ही न जिनसे मिलता हो
उनसे हाथ मिलाए कौन
जो होना था हो के रहा
अब उस पर पछ्ताए कौन
वो मुझमें मैं उसमें हूँ
रूठे कौन मनाए कौन
बेटी को अपने घर में
सारी उम्र बिठाए कौन
किसकी गोद में सर रक्खूँ
बालों को सहलाए कौन
देर रात तक परियों की
लम्बी बात सुनाए कौन
रविकांत अनमोल