मोहब्बत तुझे जब भी देखता हूं,,,,तू नया नया सा क्यों लगता है,,,❤️
सदियों पुरानी दस्ता तुम्हारी,,,,फिर हर पल जवां सा क्यों लगता है,,,❤️
ये दिल तो तेरी इबादत ही करता है,तन्हायियो में भी❤️
फिर तू इस से खफा सा क्यों लगता है,,❤️
इल्म है,,,हमे तेरे दीदार,,,को कितना तरसे थे,,,❤️
फिर तेरा हर दर्द तोफा सा क्यों लगता है,,❤️
और..
ये रंगत,,गुलाल,,सी जो तेरी हो रही है,,,इस होली में,,,❤️
तू हर किसी को रहनुमा सा क्यू लगता है,,,,❤️
तेरा तो दस्तूर है,,,,खामोसियो में एहसास ढूढने का,,,❤️
फिर महफिलों में,,,,लफ्जो का कारवां सा क्यू लगता है,,,,❤️
हम मानते है,,,,तू कभी हमारे तकदीर का हिस्सा तो नही रहा,,,❤️
फिर तेरे बिना ये दामन सुना_सुना सा क्यू लगता है,,,❤️
मेरी आरजू थी,तू मुझमें सामिल रहे,,रिश्तों की डोर में बंधे बिना ही,माहीं❤️
फिर तू किसी और से बातें करे तो बुरा सा क्यू लगता है,,❤️