प्रसिद्ध गीतकार साहिर लुधियानवी साहब का आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन ही जन्मदिन आता है तो उन्हीं के द्वारा महिलाओं पर लिखी चंद पंक्तियां
" लोग औरत को फ़क़त एक जिस्म समझ लेते हैं
रूह भी होती है उस में ये कहाँ सोचते हैं ।
कितनी सदियों से ये वहशत का चलन जारी है
कितनी सदियों से है क़ायम, ये गुनाहों का रिवाज़ "