नारी माता, बहन है ,
नारी जग का मूल।
नारी चंडी रूप है,
नारी कोमल फूल।
बिन नारी बनता नहीं,
एक सुखी परिवार।
नारी शिशु को जन्म दे,
करे जगत विस्तार।
नारी माता रूप में,
स्वयं ईश अवतार।
नारी से घर स्वर्ग है,
रहता प्रभु का वास।
माँ बन कर आशीष दे,
पत्नी बन दे साथ।
नारी बहना बन सदा,
डोरी बांधे हाथ।
नारी को पुजता ब्रम्हाँड हे,
नारी बिन उद्धार कहा है।
-Deeps Gadhvi