जब रंगा जाऊँ
तो हरा हो जाऊँ,
जब कहा जाऊँ
तो मधुर बन जाऊँ।
जब ढूंढा जाऊँ
तो व्यक्त हो जाऊँ,
जब काटा जाऊँ
तो मुलायम हो जाऊँ।
जब देखा जाऊँ
तो नजर आ जाऊँ,
जब सुना जाऊँ
तो गहन हो जाऊँ।
जब चला जाऊँ
तो स्मृति बन जाऊँ,
जब रंगा जाऊँ
तो हरा हो जाऊँ।
** महेश रौतेला