*जो बदला जा सके उसे "बदलिये",*
*जो बदला ना जा सके उसे "स्वीकारिये",*
*जो स्वीकारा न जा सके उससे दूर हो जाइये,*
*लेकिन खुद को "खुश" रखिये,*
*क्योंकि वह भी एक बड़ी "जिम्मेदारी" है।*
*"ढोंग" की जिंदगी से*
*"ढंग" की जिंदगी*
*_कहीं "बेहतर" है_।*
🌹 *जय जिनेंद्र*🌹