में कोई और नहीं
इसी मिट्टी से बनी
मिट्टी की काया हु.....
बेहोश की गेहराई में डूबी में
तुझे होश मे ले जाने आई हु
में कोई और नहीं
इसी मिट्टी से बनी
मिट्टी की काया हु.....
तेरा अश्को से क्या वास्ता
रोना तो मुझे हे,
तुझे तो सच की मंजिल
दिखाने में आई हु
में कोई और नहीं
इसी मिट्टी से बनी
मिट्टी की काया हु.....
मुजमे जुदा होने की हिम्मत कहा
में तो बन्दे को खु़दा से मिलवाने आई हु
में कोई और नहीं
इसी मिट्टी से बनी
मिट्टी की काया हु.....