ये आंखों में आसू है या काजल का पानी,
ये पैरों में पायल है या किसी बंधन की निशानी,
ये हाथों में कंगन खनक रहे हैं या है लकड़ियों के गुज ।।।
ये जो मेरे माथे की बिंदिया सिंदूर है,
क्या है यही मेरे माथे की लकीरें ,
या फिर क्या यही है मेरी जीवन की भूल।।।
एक ख्वाबों की नजर से देखा था हकीकत का जहां,
ख्वाबों की दुनिया हंसीन सी थी,
मगर हकीकत की जहा ने तो मार ही डाला।।।
यह जो सबके होठों पर हंसी सी है,
क्या है यह आने वाले किसी सजा की निशानियां।।।
है ये जो लाल रंग के मेरे सुहागन के जोड़े,
क्या यही है उस लाल रंग की कहानियां।।
लाल रंग हैं खून की भी निशानियां।।।
है जो जी मेरे बिदाई के इंतजाम,
क्या यही रह जाएंगे बस???
ये जो मिला है मुझे एक खूबसूरत सा नया परिवार,
क्या देगा ये मेरे अस्तित्व को एक नई पहचान???
ताउम्र जिसकी डोर से मैं बधी रही,
थी अब उस डोर के अंत की घड़ी।।
बचपन से आंखों में कुछ ख्वाब सा था,
कुछ करने का कुछ पाने का हौसला सा था।।।
जब सजे थे मंडप होठो पर गुमनाम हसी-सी थी ,
और दिल में ना जाने कौन-सा डर ,
जो पूछ रहे थे सवार कि ,
ये जो,
मेरे हाथों में मेहंदी के रंग हैं ,
या थी वो ,
मेरे हाथों की रेखा,
जब किस्मत की लकीरों और मेहंदी के रंग को देखा,
मेहंदी के रंग पर ऐतबार किया,
फिर इक ऐसे मंजर में खुद से सवाल किया,
की थी क्या यह मेरे सुहागन होने की निशानियां,
या मेरे अस्तित्व के अंत के कुसुरवार।
"SA"