कभी खुशियों की सरगम लिखेंगे
कभी आँखों का पानी लिखेंगे
मिल कर अब हम बड़े प्यार से ज़िंदगी की कहानी लिखेंगे
कभी खुशियों की …
सुर सजे न सजे गुनगुनाते रहें
दर्द में भी सदा मुस्कराते रहें
एक दूजे की बाहों में बैठे रहें
सात फेरों की रस्में निभाते रहें
उम्र के इस हसीं दौर को हम वक़्त की मेहरबाअनी लिखेंगे
कभी खुशियों की …
रात ढल जाएगी दिन गुज़र जाएंगे
अपनी पलकों पे सपने संवर जाएंगे
खुश्बू साँसों में आ के समा जाएगी
फूल चाहत के सारे बिखर जाएंगे
दिल के महके हुए गुलिस्तां में धड़कनों की कहानी लिखेंगे
कभी खुशियों की …
अब किसी मोड़ पर भी ना बिछड़ेंगे हम
बाँट लेंगे आएंगे जो कोई भी ग़म
आज से और अभी से यह वादा रहा
जान दे के निभाएंगे अपनी कसम
हमने सोचा है हम नाम तेरे अपनी ये ज़िंदगानी लिखेंगे
कभी खुशियों की …