तोड़ी ज़ंज़ीर गुलामी की तब देश आजाद हुआ
मिला लोकतंत्र हमको, तब देश आबाद हुआ
खून कितना बहाया, कितने ज़ुल गए फाँसी पे,
तोड़ी गोरी सल्तनत, लोकशाही का राज हुआ।
देश के महान नेताओंने यह सविधान हमे दिया,
देश की सत्ता का सुकान नागरिको को दिया।
छाती हम तान शके, विश्व के महान देश के वासी,
न कोई जातिवाद, न धर्मवाद, हम है भारतवासी।
बाबा साहब का संकलन, मुन्सी की यह निष्ठा है,
सँविधान से मत खेलो यही हमारी एक चेष्टा है।
यह सविधान में सरदार पटेल के निडर इरादे है,
जन जन को न्याय मिलेगा ऐसे नेक वादे है।।
हम आभारी है, हम ऋणी है, हम नतमस्तक है,
जिसने दिलाया लोकतंत्र हम तो उसके भक्त है।।
सदियों के बाद मिली यह आज़ादी, जाया मत करो,
जब हो लोकतंत्र पर संकट तुम वीर की भांति लड़ो।
मनोज संतोकि मानस