तूने कितनी बार मुझ जैसे इंसान से पूछ लिया था,
क्या इश्क़ नहीं या किसी और से जिंदगी जी रहे हो..?
मेने मन में ही इजहार ना करने की कई वज़ह सोच रखी थी,
तुझे पाकर तुझपे मैं पाबन्दी और गुनहगार साबित न करू,
यही सलीका था जो दूर बैठे तुझे दिल में पनाह की बाते करू,
तू मेरी होती ना फिर भी गुरूर ए महोब्बत की जुठी आस ना करू।
DEAR ZINDAGI 🤗