राह तकती मेरी आंखों के साथ,
आखिरकार उनकी नजरें मिली तो सही,
अनकही रहकर इन आंखों ने इशारों इशारों में दिल की बात बताई तो सही,
साइड ग्लास में मुझे देखते हुए वह भूल गई,
मुझे भी उनका मुस्कुराता चेहरा दिखाई दे रहा ,
देर जरूर हुई है "मित्र" मगर ,
आज मेरी मोहब्ब रंग लाई तो सही।
✍️मनिष कुमार "मित्र" 🙏