सुन ले पुकार
हे प्रभू ,
गाऊ मैं ऐसे के झूम उठे दिल; और तृप्त हो जाये हर श्रोता की आत्मा;
आशीष देना मुझे, के मैं ऐसा ही कुछ कर पाऊँ; ओ मेरे परमात्मा ।
दिल से गाऊ, तार से तार मिला पाऊं, प्रसन्नता छा जाये चहू ओर;
सुन के मेरे गीत मधुर, झूम उठे तु, ओ मेरे चित्चोर ।
भजन के सुर और तान ऐसे लगे, के तुझ तक ये पहुच पाये;
इन्हें सुन कर, तु खुद मुघ्ध हो कर, मेरी बाहों में दौडा चला आये ।
दिल से निकले, दिल तक पहुंचे, तन मन हो जाये तुझ में लीन
तडपाना न मुझे, बनना नहीं है मुझे, बिना नीर की, एक बेचैन मीन
प्रभू, कोशिश करती रहूंगी मैं, भले मै, मीराबाई न बन पाऊ।
पर पकड के रखना मुझे, खो न जाऊँ, और गीर भी न जाऊँ ।
Armin Dutia Motashaw