आज मेरे अंदर का ईशान अवस्थी जाग गया, खोया हुआ पेंटर मिल गया!
अरे मे बताना भूल गई के होली मेरा मन पसंद त्योहार है!
मेरे लिए दिवाली मतलब रंगोली है पर लगभग एक देढ़ साल बाद आज मेरे हाथो ने पेंट ब्रुश को थामा,
समय के साथ काफी चीज़े छुट जाती है
मैने छोड़ दी है
हालाँकि ये वो सारी छोटी - छोटी चीज़े है जिनसे मुझे खुशियाँ मिला करती थी!
हाँ, अच्छी चित्रकारा नही हूँ मै, थी भी नही शायद कभी पर अच्छा लगता था मुझे रंगो से सफेद काग़ज़ को मंचाहे रंग मे रंगना
बेरंग और फीकी चीज़े नापसंद है पर शायद जिंदगी ही बेरंग बना बैठी!
लेकिन ये था उस मे रंग भरने का सफल प्रयास !
अगर यहा तक पढ़ लिया है तो Comment करदो जिससे मे आपको पढ़ने के लिए शुक्रिया के ह सकु!