सुप्रभात।
आया हूँ तेरी वन्दगी में सर को झुका कर
तेरे नूर की बस एक झलक पाने के लिए।
गुमराह न हो जाऊँ कहीं दुनिया के झमेलों में
तू ही कोई राह बता अंजाम तक जाने के लिए।
नेकियों की राह में ये जिंदगी गुजर जाये
कुछ कर पाऊँ गरीबों को हंसाने के लिए।
या खुदा ये जिंदगी वतन के काम आ जाये
भूले से भी न काम हो किसी को सताने के लिए।
जमीला खातून