अलविदा ...💐💐
डॉ.हसु याज्ञिक जी...🙏🏻
डॉ. हसु याज्ञिक का जन्म 12 फरवरी 1938 को गुजरात के राजकोट में हुआ। गुजराती और संस्कृत में स्नातकोत्तर के उपरान्त याज्ञिक ने डॉक्टरेट की। इनका हिन्दी, गुजराती, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा पर पूर्ण अधिकार है। गुजराती में बतौर शिक्षण के उपरान्त हसुमुख राय याज्ञिक ने गुजरात साहित्य अकादमी क रजिस्ट्रार के रूप में अपनी सेवाएँ दी। आपने 21 उपन्यास, 23 लघु कथाओं, गुजरात के लोक साहित्य पर 25, भारतीय शास्त्रीय संगीत पर 14 पुस्तकों, 9 बाल साहित्य के अलावा मध्य गुजराती साहित्य और आदिवासी साहित्य के संपादन और शोध पर कार्य किया है। आपने गुजराती लोक संगीत, गुजराती लोक संगीत में रामकथा, फोक एपिक ऑफ वेस्टर्न इंडिया जैसे विषयों पर न केवल भारत अपितु विदेशों में पत्र वाचन कर भारत की लोक संस्कृति को विश्व स्तर पर सम्मान दिलाया। आपको लोक कला और साहित्य के क्षेत्र में शोध, संकलन और लेखन के यागदान के लिये मेघाणी अवार्ड के अलावा लंदन की में स्काईलार्क अवार्ड, डॉ. भायानी फैलोशिप से सम्मानित किया गया।गत वर्ष दिसंबर, 2019 में उन्हें पध्मभूषण डॉ. कोमल कोठारी लाइफ टाइम अचीवमेन्ट लोक कला पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
इत्यलम्...
- मधुकर माणेकबेन🙏🏻
[* गुजरात लोक संस्कृति और साहित्य
- हसु याज्ञिक
नई दिल्ली: नेशनल बुक ट्रस्ट, 2005]
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