*जीवन में सबको सब चीजें नहीं मिलती* ! कुछ विरासत में मिलती हैं कुछ अर्जित करनी पडती हैं ! *जैसे पद योग्यता से , हैसियत और संपत्ति परिश्रम से मिलते हैं पर इनकी जड है परिवार. मित्र और चरित्र जीवन वृक्ष की नींव के वे पत्थर हैं जिसके बिना वृक्ष लहलहा नहीं सकता* ! वह हरा - भरा रहे इसके लिये *चरित्र* रुपी पेड मजबूत होना जरुरी है ! *जीवन में चरित्र तो हीरे के समान है जिसकी चमक अंधेरे में भी दिखाई देती है ! चरित्र कस्तूरी मृग है जिसकी खुशबू चारों तरफ़ अनायास फ़ैलती है* ! इसलिए हम अपने चरित्र को सबसे ज्यादा महत्व दें ! " सुप्रभात जी "
।। जय सियाराम जी। ।।