कितनी मिन्नत के बाद दिसम्बर आ हीं गया
विदा करने यें मनहूस साल...
किसी के सपने, किसी के अपने
ले गया यें मनहूस साल...
इस धरती के चमकते सितारे
ले गया यें मनहूस साल...
जाते जाते न जाने कितना
कहर ढाएगा यें मनहूस साल?...
खुशी तो इस बात कि हैं
की आखिर जाएगा यें मनहूस साल...
#shabdbhavna