एक हाथ वाला बूढ़ा ...
दो वक्त की रोटी कमा लेता था
एक हाथ वाले बूढ़े को देखा
सजे सवरें बाजारों के बीच
एक अच्छा उदाहरण था वो
खाली बैठे , बेकारों के बीच
हाथ ..एक ही था उसका
मगर... हौसले उसके दुगने थे
एक मिसाल पेश करते देखा
मैंने मानसिक लाचारों के बीच
चूड़ी , बिंदी , टिकुली...
वो बदन पर दुकान लगाए था
सजने के सारे सामान
फटे कुर्ते पर लटकाया था
फिक्स दाम की दुकान थी उसकी
मोल भाव नहीं करता था
बाजार की सबसे सस्ती दुकान थी वो
बस इतना ही वो कहता था
एक सांस में सारे
सामानों के दाम बता देता था
वो एक हाथ वाला बूढ़ा
दो वक्त की रोटी कमा लेता था
उसे देखता हुआ , कुछ देर मै वहीं रुका
एक ही इंसान से आज , मैं बहुत कुछ सीखा ..
पेट भरने भर का कमा लेता था
वो व्यापारी इशारों के बीच
पूरे दिन की कमाई गिन रहा था
बन्द दुकानों के दीवारों के बीच
लिए कटोरे बैठे होते थे
कुछ हस्ठ पुष्ठ , पेट की गरीबी से जो
कुछ सिक्के कटोरे में
डाल देता था , दिल की अमीरी से वो
चेहरे पर थी झुर्रियां
लेकिन बड़ा प्यारा था वो
बस एक बात पे खीझता था
कि एक बेसहारा था वो
थी चेहरे पर एक मुस्कान प्यारी
वो दुख के मुंह पर तमाचा था
अजीब था वो, इतनी मुश्किलों में भी
खुश रहने का शायद, उसके पास कोई सांचा था
थोड़ी देर बाद , एक ढाबे पर वो मुझे दिखा
बांट कर खाना , रहा था वो सबको सीखा
थाली सजी छोड़ वो , एक रोटी लिए बाहर आया था
खुद खाने से पहले उसने , कुत्तों को रोटी खिलाया था
पहचान था वो , अभिमान था वो,
, एक तमाचा था वो...
भगवान को कोसने वाले
अनगिनत शर्मसारों के बीच
एक हाथ वाले बूढ़े को देखा
सजे सवरें बाजारों के बीच
एक अच्छा उदाहरण था वो
खाली बैठे , बेकारों के बीच
#Poetic_Pandey