प्यार की बाढ़ उतर चुकी है
अगली बार कब वर्षा होगी,
कब बादल फटेका
कब पहाड़ टूट कर गिरेगा?
पता नहीं!
कब प्यार की रिमझिम में
बच्चे दौड़गे
एक सुरीला गीत सुनने में आयेगा
एक कहानी कही जायेगी!
कब आकाश में बिजली चमकेगी
गर्जन से खिड़कियां खड़खड़ायेंगी,
कब भूमि गीली हो
उपजाऊ बनेगी,पता नहीं!
* महेश रौतेला