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जब आएंगे तुम्हारे शहर तो छोड़ कर जाएंगे तेरे होठों पर थोड़े प्रेम के निशां। तुम से मिलते वक़्त बातें कम और तुम्हें देखता ज़्यादा रहूंगा। तुम पढ़ लेना मेरी आँखों की भाषा। और ले कर आऊंगा कुछ प्रेमपत्र, जो मेरे लौटने के बाद मेरी और हमारी बातें करता रहेगा। औऱ लौटते वक्त छोड़ जाऊंगा खुद को तेरे पास, क्योंकि तुम्हारे साथ रहने का एहसास रहेगा तुम को। तुम से मैं कुछ नहीं मांगूगा सिवा तुम्हारी कुछ मीठी यादों के। एक मेरे माथे पर तुम्हारा चुम्बन और कुछ तुम्हारी पढ़ी हुई किताबें कि जिन्हें मैं जीना चाहता हूँ, तुम्हारे साथ। गर ऐसा हुआ तो ये काफी होगा पहली मुलाकात में ले कर आया हुआ सब कुछ, पूरी ज़िंदगी गुज़ारने के लिए.....