न चाहत चांद सितारों की, न चाहत दौलत और ऐशोआराम की,
हमे चाहिए बस थोड़ी सी जगह आपके दिल मे, जहा दुनिया बस सके हम अपने अरमानोंकी ।
न चाहत कीमती कपड़ो और ज़ेवर की,
बस चाहत है प्यारी सी ननद और नटखट देवर की ।
माना ज़माना है थोडा दुशवार,
फिर भी बनाएंगे हम खूबसूरत आशियाना लेकर परिवार का ढेर सारा प्यार ।
~ रुचिता गाबाणी