क्या कुछ भी नही रहा
फ़ासले इतने बढ़ गये
कल तक जो साथ थे
आज रास्तों में बंट गये
पहली मुलाकात की हंसी
क्यों दर्द में बदल गई
समझ इतनी थी फिर
कैसे नासमझी कर गई
अहम पर चोट थी या
कुछ गुरूर आ गया
सम्भाल लेते थोड़ा तुम
कैसे रिश्ता खत्म हुआ
यादों केे सफर को क्या
तुम कभी भुल पाओगे
गलतियों की दरारो पर
कौनसा मरहम लगाओगे??
#yogitajain ✍🏻