भीतर क्षमा हो, तो क्षमा निकलेगी..
भीतर क्रोध हो, तो क्रोध निकलेगा..
भीतर प्रार्थना हो, तो प्रार्थना निकलेगी..
भीतर नफरत हो, तो नफरत निकलेगी..
इसलिए जब भी कुछ बाहर निकले,
तो दूसरे को दोषी मत ठहराना,
यह हमारी ही संपदा है जिसको
हम अपने भीतर छिपाए हैं।
jay shree krishna
very good morning