ख़ुशबू तेरे प्यार की
महका जाती है अक्सर,
दिन में खिलती बेला -सी
महकी रहती हूँ शब भर।
भेंट मिली जीवन भर की
अब तक दामन भरा हुआ,
प्रेम का मदमाता प्याला
पीती हूँ अंजलि भर कर।
जिन वासंती राहों पर
साथ चले हम हाथ पकड़,
उन गलियों में मेरा मन
भागा करता है दिन भर।
सांझ के नीरव अंधियारे में
सूने घर में दीप जला,
यादों के झिलमिल जुगनू -सी
पल-पल जलती जीवन भर।
-मधुमयी