बोली प्रितम को बाहों में भरकर प्रिय,
लगता है तुम कुछ बदल रहें हो।
तुम आते हो पास मेरे प्रिय
कही और मगर चल रहे हो।
आते जरूर हो करीब मेरे प्रिय
किसी और को पास रख रहे हो।
ये अलग बात है कि हम चाहे तुम्हे प्रिय
तुम मगर चाहत अपनी बदल रहे हो।
तुमने गुजारे साथ जो लम्हे साथ मेरे प्रिय
उन्हें भूलने की कोशिश कर रहे हो।