हर मासूम का दिल को बस ,
बसमे करता है ।
अए जमाने तू जिसे मोहब्बत कहता ,
वो जिस्म पर दम तोडता है ।।
किसे याद रहती है मेहबूब की आँखे ,
याद सिर्फ गले के निचे भाग रहता है ।
कसम चाहे लाख खाए ,
ए लड़कियो वो सिर्फ इन्सान में दरिंदा होता है ।।
कितनी आबरू जाती है खामोसी से ,
जमाना उसे कब जान पडता है ।
खामोस हो जाती है धड़कने ,
जब किसी का सच सामने आता है ।।
कितना चीखते हो तुम जब भी ,
वो दर्द याद आता है ।
याद रखना प्रेम जिस्म से परे है ,
प्रेम जिस्म में ना नजर आता है।।