कोरोना'की याद में
सुरेन्द्र चतुर्वेदी जी की क्षमायाचना के साथ 🙏
ज़मी को क़ब्रिस्तान बनाने की तय्यारी,
आसमान में आग लगाने की तय्यारी।
क़त्ल के साथ मे क़ातिल भी मारे जाएंगे,
दरियाओं में ख़ून बहाने की तय्यारी।
गला घोंटने को मौसम आने वाला है,
बाग़ बग़ीचों को जलवाने की तय्यारी।
लहू उबलने की आदत से बाज़ न आया,
रगों में अब के बर्फ़ जमाने की तय्यारी।
ज़िन्दा लोगों की चुप्पी को इंतज़ार है,
है मुर्दों के शोर मचाने की तय्यारी।
बाज़ारों में करने लगे हैं मिल के दरिन्दे,
शैतानों का साथ निभाने की तय्यारी।
जंगल और जानवर डर कर देख रहे हैं,
दुनिया के वहशी हो जाने की तय्यारी।
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
Courtesy ~ Sufi Surendra Chaturvedi ji.