खुशी'" उड़ती हुई तितली के जैसी है...
जिसे पकड़ने के लिए आप जितना दौड़ेंगे ये...
उतना ही आपसे दूर चली जायेगी...
यदि आप शान्त मुद्रा मे एक जगह स्थिर हो जायेंगे तो...
ये खुद पे खुद आपके कंधे के पास बैठ जायेगी...
खुशी के पीछे मत भागो महसूस करो...
हँसते रहिये हँसाते रहिये सदा खुश रहिये!