माँ दुनिया की सबसे बड़ी योद्धा है,
"गर चुप रहे तो" ये बात बताना भूल गई दुनिया,
दुनिया के अहसानो तले दबी हुई माँ
क्यों खुद की बेटी को बोल नही पाती की,
"बिटियाँ, गलत को गलत ही बताना,
किसीके दबाव में कभी न झुक जाना,
कर्तव्य तुम्हारे शिरहाने हो उसे निभाना,
किन्तु हक भी तुम्हारा छीनना पड़े तो मत घबराना,
गर माँगते माँगते मर जाना पड़े तो शिद्दत से मर जाना,
पर किसीकी हवस और लालच में न पीस जाना"
खुद की पीड़ाएँ बेटी में क्यो दोहराना चाहती है माँ,
दुसरो से न्याय की आशा रखती,
खुद न्यायदेवी नही बन पाती माँ ।।
©हिना दासा