पड़ाव
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जिंदगी में अब वह मुकाम आ गया है
ऊपर से खुदा का पैगाम आ गया है
चला -चली का मेला है दुनिया सारी
प्रेम का लब पर अब नाम आ गया है ।
जिंदगी में आए कई पड़ाव ऐसे भी
गुजर गई जिंदगी हँसी -खुशी जैसे भी
लेती है परीक्षा हरदम जिंदगानी यहाँ
मन का किसी को मिलता नहीं वैसे भी ।
वक्त चलता रहता है अपनी ही चाल
गुजरते रहते हैं यूँही साल दर साल
खामोश हो जिंदगी सब सह जाती है
कौन किस से पूछे अब उनके हाल।
आभा दवे
मुंबई
26-9-2020
शनिवार